।। हमारे जाबाज़ वीरों को नमन ।।
आकर हमको कसम दे गयी राखी किसी बहन की ।
देंगे अपना शीश, न देंगे मिटटी मगर वतन की ।।
आज 13 दिसंबर ,2011,10 साल बीत चुके हैं लेकिन फिर भी कोई ठोस क़दम नहीं।
काश की देश में ऐसा कानून होता की अपराधियों,अलगाववादियों,आतंकवादियों चाहें वो किसी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय के हों उन्हें पुलिस या जेलों में न सौपकर सीधा भारतीय सेना को सौप दिया जाता जहाँ पर राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता।
उन को वही दंड दिया जाता जिस के वो हक़दार हैं।
हमारे देश के लिए इस से ज्यादा शर्मनाक बात और क्या हों सकती है की लोकतंत्र का मंदिर ‘संसद’ पर हमला करने वाले आज हमले के 10 साल बाद भी उस सजा को नही पाए जिस के वो हक़दार थे।
आज ज़रूरत है की आतंकवादियों, अपराधियों आदि का नियंत्रण हमारी भारतीय सेना को दे दिया जाय।
जहाँ पर कोई राजनीतिक हस्तक्षेप न हों। और ये भ्रष्ट राजनेता अपनी रोटियां सेकनें से बाज़ आयें।
हम उन सभी अमर वीरों को अपनी ।
